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Thursday, September 23, 2021

बरेली में क्षतिग्रस्त मार्ग पर ई-रिक्शा पलटने से गई मासूम की जान - दैनिक जागरण

जागरण संवाददाता : आंवला से अतरछेड़ी होकर बिशारतगंज तक जाने वाला मार्ग इतना ज्यादा क्षतिग्रस्त हो गया है कि इस पर राहगीरों का चलना मुश्किल है। गुरुवार को इसी मार्ग पर एक ई-रिक्शा पलटने से पांच माह के मासूम की जान चली गई। दोपहर में आंवला के मुहल्ला गौसिया चौक का ई-रिक्शा चालक कस्बे से सवारियां लेकर आंवला जा रहा था। उसके ई-रिक्शे में ग्राम अतरछेड़ी के सद्दाम व उनकी पत्नी अपने पांच माह के बच्चे के साथ बैठी थीं। ग्राम डरुआपुर के समीप अरिल नदी के ऊपर बने काज-वे के ढाल पर सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण ई-रिक्शा पलट गया, जिसमें सद्दाम की पत्नी व उनका बच्चा उसके नीचे दब गए, जिसमें बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। बच्चे के पिता ने ई-रिक्शा चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

आए दिन हो रहीं दुर्घटनाएं, नहीं कराई गई मरम्मत

आंवला व बिथरी चैनपुर दो विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आंवला-अतरछेड़ी मार्ग आता है, जो पूरी तरह से बदहाल है। निर्माण तो दूर अभी तक मरम्मत की सुध नहीं ली गई है। इस वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। क्षेत्र के मनोज सिंह, आदेश मौर्य, योगेश अग्रवाल व देशपाल वर्मा ने बताया कि दोनों क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों से कई बार मरम्मत के लिए कहा गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

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दस साल पहले हुआ था सड़क का निर्माण

दस साल पूर्व लोक निर्माण विभाग ने आंवला-अतरछेड़ी मार्ग का निर्माण कराया था। धीरे धीरे यह मार्ग गड्ढों में तब्दील हो गया। जहां से आवाजाही में लोगों को दिक्कत हो रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार खामोश हैं। इसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।

Edited By: Jagran

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बहुप्रतीक्षित बाईपास मार्ग को मिले 73.75 लाख - Hindustan हिंदी

सिकन्दरपुर। हिन्दुस्तान संवाद

करीब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद जलालीपुर-घुरी बाबा के टोला बाईपास मार्ग के लिए राज्य सरकार ने बजट मंजूर कर दिया है। करीब 3.5 किमी लंबे इस बाईपास के लिए 73.75 लाख रुपये अवमुक्त किया गया है। इसके अलावा तहसील क्षेत्र के दो अन्य मार्गों के लिए भी सरकार ने एक करोड़ रुपये रिलीज किये हैं। पूर्वांचल विकास निधि से बनने वाले इन मार्गों का निर्माण पिछले कई वर्षों से धनाभाव के कारण रुका पड़ा था।

सिकन्दरपुर बस स्टैंड चौराहा पर होने वाली भीड़ व जाम को देखते हुए साल 2015 में तत्कालीन मंत्री मो. रिजवी ने जलालीपुर से किशोर चतुरसंटी व गांगकिशोर होते हुए घुरीबाबा के टोला तक 3.5 किमी लंबा बाईपास स्वीकृत कराया था। करीब 1.47 करोड़ की लागत से बनने वाले इस मार्ग के लिए 29.5 लाख रुपये भी स्वीकृत हो गया। कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी ने पटरी निर्माण व एक कोट गिट्टी डाल कर धन के अभाव में काम रोक दिया। तब से इसका काम रुका पड़ा था।

‘हिंदुस्तान ने 11 सितंबर के अंक में इसे प्रमुखता से प्रकाशित भी किया था। इधर एक सप्ताह पहले सरकार ने उक्त मार्ग के लिए 73.75 लाख रुपये अवमुक्त कर इसकी सूचना सबंधित विभाग को दे दी है। इसके अलावा साल 2015 से ही अधर में लटके मनियर सिकन्दरपुर मार्ग से चेतन किशोर मैदान होते हुए ब्रह्मस्थान (राजभर बस्ती) से गणपति यादव के घर तक जाने वाले दो किमी मार्ग हेतु 50 लाख व भुड़ीडीह से फिरोजपुर तक दो किमी लंबे मार्ग के लिये भी 50 लाख रुपये अवमुक्त किया गया है। सरकार से धन मिलने के बाद एक बार फिर निर्माण कार्य पूरा होने की आस जग गयी है।

इनसेट

वर्षों से लम्बित प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने की आस

करीब पांच वर्ष पूर्व स्वीकृत इन तीन परियोजनाओं का निर्माण पूर्वांचल विकास निधि से कराया जाना था। 3.0795 करोड़ की लागत से बनने वाली इन सड़कों की कुल लम्बाई 7.5 किमी है। पूर्ववर्ती सरकार ने इन बाबत 61.58 लाख रुपये स्वीकृत किये थे। अब प्रदेश सरकार ने उक्त मार्गों के निर्माण हेतु 173.75 लाख रुपये जारी कर दिए हैं। लिहाजा वर्षों से लंबित इन परियोजनाओं का कार्य जल्दी शुरू होने की उम्मीद बढ़ गयी है।

कोट:

सरकार ने तीनों परियोजनाओं के लिए 173.75 लाख रुपये जारी कर दिए हैं। जल्द ही औपचारिकता पूरी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

क्षितिज जायसवाल, सहायक अभियंता, लोनिवि

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केंद्रीय विद्यालय मार्ग पर एचटी केबिल से हादसा होने की संभावना - अमर उजाला

सड़क के गड्ढे में कट रही एचटी केबिल - फोटो : LALITPUR

ख़बर सुनें

ललितपुर। नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही से केंद्रीय विद्यालय से होकर बुढवार तक जाने वाले मार्ग पर गड्ढे होने से अंडरग्राउंड हाईटेंशन लाइन की केबल खुलकर कटने लगी है। इससे किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। बृहस्पतिवार को मोहल्ले के लोगों ने डीएम को ज्ञापन देकर सड़क को शीघ्र दुरुस्त कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि गड्ढों से निकलकर कट रही अंडरग्राउंड एचटी केबल तत्काल सुधरवाई जाए अन्यथा जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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मोहल्ला सिविल लाइन निवासी लोगों ने डीएम को दिए ज्ञापन में बताया है कि इस सड़क पर गोविंद सागर नहर से आईटीआई के मध्य काफी गड्ढे हो गए हैं। अब तो इन गड्ढों ने वाहनों का निकलना भी जोखिम भरा कर दिया है। आए दिन बाइक सवार लोग गड्ढों में गिरकर चुटहिल हो रहे। इस सड़क पर ट्रांसफार्मर के लिए डाली गई अंडरग्राउंड केबल खुल गई है अब इसके ऊपर से वाहनों के निकले से केबल कटने लगी है। यदि समय रहते इसे दुरुस्त न किया गया तो किसी भी समय यहां बड़ा हादसा हो सकता है। ज्ञापन पर गंदर्भ सिंह यादव, सुरेंद्र, रामदयाल, रवि, गजेंद्र सिंह, राम किशोर, इरशाद, राधवेंद्र, धनुषराम, जितेंद्र, रामेश्वर, चरन सिंह सहित करीब पचास लोगों के हस्ताक्षर हैं।
ओवरब्रिज बनने से बंद कर दिया गया जाखलौन-देवगढ़ मार्ग
जाखलौन रोड पर ओवरब्रिज बनने के कारण स्टेशन से देवगढ़ मार्ग बंद कर दिया गया है। इस कारण उस मार्ग से जाने वाले वाहनों को सिद्धन मार्ग (केंद्रीय विद्यालय मार्ग) से डायवर्ट कर दिया गया है। इस कारण इस मार्ग पर ट्रैफिक बढ़ जाने और गड्ढे गहरे होने से लोगों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।
ट्रांसफार्मर के लिए डाली गई अंडरग्राउंड केबल सड़क पर गड्ढा होने से खुलकर कटने लगी है। यदि विभागीय अफसरों ने ध्यान न दिया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। डीएम को इस संबंध में ज्ञापन देकर गड्ढों व केबल की मरम्मत करवाने की मांग की है। गंदर्भ सिंह यादव
सिद्धन मंदिर मार्ग से आए दिन आना जाना होता है। इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। इन गड्ढों में दो बार बाइक फिसलने से गिर भी चुके हैं। प्रभारी मंत्री को इस सड़क को देखना चाहिए इससे अधिकारियों के दावों की पोल खुल जाती।- वीरेंद्र सिंह
नगर पालिका प्रशासन को इस ओर देखना चाहिए। सड़क न बनवा सके तो गड्ढे ही भरवा दें, जिससे निकलना आसान हो जाएगा। कई बार इस सड़क से निकलने के दौरान लोगों को गड्ढे में गिरते देख चुका हूं। प्रभारी मंत्री व जनपद के जनप्रतिनिधि इस सड़क को जल्द बनवा दें तो राहत मिल जाएगी।-राम किशोर

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केंद्रीय विद्यालय मार्ग पर एचटी केबिल से हादसा होने की संभावना - अमर उजाला
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बहुप्रतीक्षित बाईपास मार्ग को मिले 73.75 लाख - Hindustan हिंदी

सिकन्दरपुर। हिन्दुस्तान संवाद

करीब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद जलालीपुर-घुरी बाबा के टोला बाईपास मार्ग के लिए राज्य सरकार ने बजट मंजूर कर दिया है। करीब 3.5 किमी लंबे इस बाईपास के लिए 73.75 लाख रुपये अवमुक्त किया गया है। इसके अलावा तहसील क्षेत्र के दो अन्य मार्गों के लिए भी सरकार ने एक करोड़ रुपये रिलीज किये हैं। पूर्वांचल विकास निधि से बनने वाले इन मार्गों का निर्माण पिछले कई वर्षों से धनाभाव के कारण रुका पड़ा था।

सिकन्दरपुर बस स्टैंड चौराहा पर होने वाली भीड़ व जाम को देखते हुए साल 2015 में तत्कालीन मंत्री मो. रिजवी ने जलालीपुर से किशोर चतुरसंटी व गांगकिशोर होते हुए घुरीबाबा के टोला तक 3.5 किमी लंबा बाईपास स्वीकृत कराया था। करीब 1.47 करोड़ की लागत से बनने वाले इस मार्ग के लिए 29.5 लाख रुपये भी स्वीकृत हो गया। कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी ने पटरी निर्माण व एक कोट गिट्टी डाल कर धन के अभाव में काम रोक दिया। तब से इसका काम रुका पड़ा था।

‘हिंदुस्तान ने 11 सितंबर के अंक में इसे प्रमुखता से प्रकाशित भी किया था। इधर एक सप्ताह पहले सरकार ने उक्त मार्ग के लिए 73.75 लाख रुपये अवमुक्त कर इसकी सूचना सबंधित विभाग को दे दी है। इसके अलावा साल 2015 से ही अधर में लटके मनियर सिकन्दरपुर मार्ग से चेतन किशोर मैदान होते हुए ब्रह्मस्थान (राजभर बस्ती) से गणपति यादव के घर तक जाने वाले दो किमी मार्ग हेतु 50 लाख व भुड़ीडीह से फिरोजपुर तक दो किमी लंबे मार्ग के लिये भी 50 लाख रुपये अवमुक्त किया गया है। सरकार से धन मिलने के बाद एक बार फिर निर्माण कार्य पूरा होने की आस जग गयी है।

वर्षों से लम्बित प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने की आस

करीब पांच वर्ष पूर्व स्वीकृत इन तीन परियोजनाओं का निर्माण पूर्वांचल विकास निधि से कराया जाना था। 3.0795 करोड़ की लागत से बनने वाली इन सड़कों की कुल लम्बाई 7.5 किमी है। पूर्ववर्ती सरकार ने इन बाबत 61.58 लाख रुपये स्वीकृत किये थे। अब प्रदेश सरकार ने उक्त मार्गों के निर्माण हेतु 173.75 लाख रुपये जारी कर दिए हैं। लिहाजा वर्षों से लंबित इन परियोजनाओं का कार्य जल्दी शुरू होने की उम्मीद बढ़ गयी है।

कोट:

सरकार ने तीनों परियोजनाओं के लिए 173.75 लाख रुपये जारी कर दिए हैं। जल्द ही औपचारिकता पूरी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

क्षितिज जायसवाल, सहायक अभियंता, लोनिवि

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खतौली कस्बा: कर्मवीर पं. सुंदरलाल मार्ग की धुंधली इबारत - अमर उजाला

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का खतौली कस्बा। यह कर्मवीर पंडित सुंदरलाल का जन्मस्थान है। करीब डेढ़ लाख की आबादी वाली इस बस्ती की घनी बसावट में घंटाघर गली का यह मुहल्ला कभी इमली तला कहा जाता था। पंडित जी के चचेरे भाई डॉ. प्रेमशरण श्रीवास्तव मुझे भेजे गए अपने पत्रों में 'पं. सुंदरलाल मार्ग' के नाम के साथ अपना यही पता दर्ज करते थे। 
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यहां पंडित जी का पुश्तैनी मकान 2016 में बिक चुका है और उस पुरानी रिहाइश का चेहरा-मोहरा भी अब पहले जैसा नहीं रहा। बाहर कई दुकानें बन गई हैं, लेकिन मकान के भीतर कुछ हिस्से में अभी पुरानी छवियां और रंग-रोगन विद्यमान हैं। हम बड़ी रिहाइश के उस खंड को भी देखने जा पहुंचे, जिसके दरवाजे के ऊपर पुराने सफेद पत्थर पर 'मनोहरी कुटी’ हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में लिखा हुआ है। 

निकट की पतली गली में लगे दरवाजे से अंदर पहुंचने पर हमें वह कक्ष भी दिखाया गया, जिसमें 26 सितंबर, 1886 को पंडित जी का जन्म हुआ था। भीतर आने वाली इस सड़क के मुहाने पर 26 जनवरी, 1987 को लगाए गए 'पं. सुंदरलाल मार्ग' के पत्थर को हम देर से खोज रहे हैं। चुनावी और विज्ञापनों के पोस्टरों से पूरी तरह ढकी इस स्मृति-शिला को हमने देर तक पानी से धोया। इस पूरे इलाके में उनके इस एकमात्र कीर्ति-स्तंभ की ओर किसी का ध्यान नहीं। 

मुझे याद है कि मेरठ विश्वविद्यालय हिंदी परिषद के मुजफ्फरनगर अधिवेशन (1978) में पंडित जी का सम्मान करते हुए मुजफ्फरनगर संदर्भ नामक पुस्तक उन्हें भेंट की गई थी, जिसके बाद 1985 में खतौली पत्रकार मंच ने 'पंडित सुंदरलाल स्मृति पुरस्कार’ की घोषणा भी की। जवाहरलाल नेहरू ने एक समय पंडित जी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का अनुरोध किया था, पर मुक्ति का वह योद्धा उस संसदीय मार्ग में चलने के लिए तैयार नहीं हुआ। 

पं. बनारसीदास चतुर्वेदी ने एक बार कहा भी था कि उनके दिमाग में मोटरकार से जाते हुए एमएलए सुंदरलाल की कल्पना ही नहीं आती। 23 दिसंबर, 1912 को एक सचेत क्रांतिकारी के रूप में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की सवारी पर दिल्ली के चांदनी चौक में बम फेंकने की रासबिहारी बोस की योजना से जुड़कर वह विप्लव के जिस पथ पर आगे बढ़े, वहां से फिर डिगे नहीं। यद्यपि वह उस घटना के बाद संन्यासी बनकर सोलन चले गए। 


उसके बाद कांग्रेस के आंदोलन में पंडित जी का आना एक बड़ा परिवर्तन था। फिर भी वह अपनी उग्र सक्रियता के चलते दूसरे कांग्रेसियों या गांधीवादियों से पृथक पहचान बनाए रहे। डॉ. मुल्कराज आनंद ने मुझे बताया था कि एक समय नेहरू, एमएन राय और सुंदरलाल जी को घोर रूढ़िवादियों द्वारा कांग्रेस में ‘छिपे हुए साम्यवादी’ की उपाधि से विभूषित किया जाता था। 

सुंदरलाल जी की विद्वता का सबसे बड़ा साक्ष्य यह है कि भारत में अंग्रेजी राज जैसा ग्रंथ लिखकर उन्होंने अंग्रेजों को उसकी सच्चाई बताने का काम किया। उन दिनों चांद के संपादक रामरख सहगल ने उनके उस ऐतिहासिक ग्रंथ को बहुत खतरा उठाकर प्रकाशित किया, जिसे साम्राज्यवादी हुकूमत ने खतरनाक मानकर जब्त कर लिया। उस पुस्तक में हिंदू-मुस्लिम एकता के सूत्र इस तरह सूचीबद्ध किए गए कि उसमें एक अलग हिंदुस्तान के निर्माण के संकेत साफ-साफ झांकते-बोलते दिखाई पड़ते हैं, जिन्हें सामने रखकर आज भी समाज में सद्भाव की मजबूत इमारत बनाने का उद्यम किया जा सकता है। 

नौ मई, 1981 को दिल्ली में पंडित जी का जब निधन हुआ, तब लगा कि कौमी एकता का वह सबसे बड़ा पहरुआ हमसे बिछुड़ गया, जिसकी हमें अभी जरूरत थी। हिंदू-मुस्लिम ऐक्य के इस प्रबल पक्षधर को पीठ पीछे लोग मौलाना सुंदरलाल भी कहने लगे थे। जीवन के अंतिम दिनों में वह दिल्ली में इश्तियाक मिर्जा के परिवारी सदस्य के रूप में रहे। पंडित जी से एक बार महात्मा गांधी ने पूछा था, 'सुंदरलाल, सांप्रदायिकता की आंधी में मैंने बड़े-बड़े नेताओं को बदलते हुए देखा, किंतु तुम अपने विश्वास में अटल रहे, इसके पीछे क्या कारण है?'

पंडित जी ने गांधी जी को बताया कि बचपन में पिता उनका पट्टी पूजन आर्य संस्कृति से कराना चाहते थे, जबकि उनके दादा इस बात पर दृढ़ थे कि बालक की उंगलियां हाथों में लेकर तख्ती पर खड़िया-मिट्टी से अलिफ लिखवाया जाए। आखिर दोनों ही तरीके से उनका पाटी-पूजन संपन्न हुआ। एक मौलवी साहब ने कुरान की आयतें पढ़ते हुए अलिफ, तो दूसरी ओर वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए श्री गणेशाय नमः लिखवाया गया। 

पंडित जी ने बाद में आत्मकथा भी बोलकर लिखाई, जिसमें कर्मयोगी और भविष्य के उनके संपादन के साथ इलाहाबाद, नागपुर की हलचलें, सांप्रदायिक सद्भाव के लिए उनके प्रयत्नों के साथ ही विश्व-शांति आंदोलन के लिए किए गए उनके कामकाज उद्घाटित हुए हैं। उन्हें सुनना हमें समृद्ध करता था। खतौली में पंडित जी के घर से लौटते हुए सोच रहा हूं कि यह मुजफ्फरनगर जिला, जिसे एक समय मुहब्बतनगर कहा जाता था, शमशेर बहादुर सिंह, विष्णु प्रभाकर, गिरिराज किशोर और भीमसेन त्यागी जैसे साहित्यकारों की भी जन्मभूमि है।

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खतौली कस्बा: कर्मवीर पं. सुंदरलाल मार्ग की धुंधली इबारत - अमर उजाला
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हावड़ा-रांची स्पेशल ट्रेन के मार्ग में पर?... - newswing

Ranchi : खड़गपुर मंडल के मिदनापुर स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज के निर्माण के लिए 26/09/2021 को गार्डर लॉन्च किया जायेगा. ऐसे में कई ट्रेनें परिवर्तित मार्ग से चलेंगी. ट्रेन 08628 रांची-हावड़ा स्पेशल ट्रेन (यात्रा प्रारंभ दिनांक 26/09/2021) अपने निर्धारित मार्ग (वाया आद्रा) के स्थान पर ट्रेन संख्या 02896 रांची-हावड़ा स्पेशल ट्रेन (वाया टाटा) के मार्ग एवं ठहराव पर चलेगी.

ट्रेन 08627 हावड़ा-रांची स्पेशल ट्रेन (यात्रा प्रारंभ 26/09/2021) अपने निर्धारित मार्ग (वाया आद्रा) के स्थान पर ट्रेन संख्या 02895 हावड़ा-रांची स्पेशल ट्रेन (वाया टाटा) के मार्ग एवं ठहराव पर चलेगी.

इसे भी पढ़ें:झारखंड प्रशासनिक सेवा के 21 अधिकारियों का तबादला

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बारिश से जगह-जगह भूस्खलन, 20 मोटर और संपर्क मार्ग बंद - दैनिक जागरण

संवाद सूत्र, साहिया: जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में बारिश से जगह-जगह हुए भूस्खलन के कारण 20 मोटर और संपर्क मार्ग बाधित हो गए। जौनसार के मुख्य मार्गों पर यातायात बाधित होने से जनजीवन प्रभावित रहा। फसलें मंडी तक नहीं पहुंची, जिसके चलते किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। मार्ग बंद होने से सैकड़ों गांवों, मजरों और खेड़ों में ग्रामीण कैद होकर रह गए। लोक निर्माण विभाग साहिया खंड और पीएमजीएसवाई कालसी की ओर से बंद मार्गो को खोलने के लिए जेसीबी लगाई गई, लेकिन लगातार बारिश के चलते खोले गए कालसी-चकराता और साहिया क्वानू मोटर मार्ग दोबारा से बंद हो गए हैं।

पछवादून और जौनसार-बावर में बुधवार रात से शुरू हुई हल्की बारिश गुरुवार देर रात तक जारी रही। कुछ अंतराल पर हो रही बारिश के कारण विभिन्न मार्र्गो पर पहाड़ दरकने से मलबा आ गया। इसमें प्रमुख 16 मार्गो समेत 20 मोटर और संपर्क मार्ग पर यातायात बाधित है। जौनसार-बावर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर बुधवार रात में ही जजरेड के पास यातायात बाधित हो गया था। लोक निर्माण विभाग ने जेसीबी लगाकर दूसरे दिन सुबह नौ बजे यातायात सुचारू कराया, लेकिन लगातार बारिश की वजह से जजरेड पहाड़ी पर भूस्खलन से जौनसार की लाइफ लाइन फिर से बाधित हो गई। मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। जौनसार-बावर के मुख्य मार्ग बाधित होने से किसानों की उपज टमाटर, अदरक, गागली, बीन्स आदि मंडी नहीं पहुंची, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। बारिश से लोनिवि के कालसी-चकराता, दातनु-बडनु, साहिया-क्वानू, डियुंडिलानी-सकरोल, समरजेंस, शहीद सुरेश तोमर मार्ग, काहा नेहरा-पुनाहा, नागथात लाछा, हईया अलसी, शंभू की चौकी-पंजिया, बडनू-बिजोऊ, लालपुल-बिरमोऊ, पीएमजीएसवाई कालसी के मसराड मार्ग, दारागाड-कथियान, हयो।टगरी, क्यारापूल डामटा मोटर मार्ग पर यातायात बाधित है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता डीपी सिंह के अनुसार मलबा आने से बाधित सड़कों पर यातायात सुचारू करने के प्रयास जारी हैं। जेसीबी से मलबा हटवाया जा रहा है।

Edited By: Jagran

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जोखिम भरा है सिढ़पुरा-सहावर मार्ग पर सफर करना - दैनिक जागरण

सिढ़पुरा, संवाद सूत्र : सिढ़पुरा-सहावर बाया मोहनपुर तक सड़क बदहाल हालत में है। इस मार्ग पर सफर करना जोखिम भरा है। वाहन चालकों को तो परेशानी ...